Saturday, April 15, 2017

सेकुलर बनाम तुष्टिकरण - भाई जागो, क्यों 18वी सदी में रहना चाहते हो?

कई सारे देशों का कॉपी पेस्ट है भारतीय संविधान। इसीलिए कुछ भी (नहीं) सही है। एक लाइन जिस बात को recommend करती है, दूसरी लाइन उसे ही prohibit करती है। ऐसे में जनता को झांसा देना (आसान) है। 1952 में तो ज़ल्दी थी।

अब बैठ कर इत्मीनान से नया संविधान लिखा जाये। और उसमें पहले secular का मतलब बदला जाये। पहले सेक्युलर शब्द में से तुष्टिकरण हटा दिया जाये। रिजर्वेशन व कोटा बाद में।

तुष्टिकरण के चलते बंगाल भी कश्मीर बन गया। तुष्टिकरण के कारण रोज केरल में RSS कार्यकर्ता मारे जा रहें है। और सरकार किसी की भी हो, इस सब से उनका कुछ लेना देना नहीं है। वो तो बस अगले चुनाव की तैयारियों में रहती हैं हमेशा।

यहाँ एक्शन भी वोटबैंक के हिसाब से लिया जाता है। कश्मीर में जवानों के हाथ पाँव बांध दिए और बंगाल में ममता को खुली छूट दे रखे हैं कि पुलिस अब हिन्दू उत्सवों पर समुदाय विशेष के लोगों पर लाठियां बरसाती है। उनके प्रार्थनास्थल से घंटियाँ तक छीन लीं जातीं हैं। उधर तमिलनाडु अपने को अलग राष्ट्र ही समझता है। किसी actor-turned-politician ने united states of south का जिम्मा ले लिया है।

काट दो। उधर से कश्मीर, इधर से बंगाल तो काट ही दो। फिर केरल व TN भी हटा ही दो। क्या रह जाता है?
किसीको क्या फर्क पड़ता है? हम सभी तो बस अगले महीने के इंतजार में जी लेते हैं। बाकी का संविधान जाने और उसका (नाजायज) प्रयोग करने वाले जाने।

देश को और कितने टुकड़ों में बांटेगे, अपने स्वार्थ के लिये? किसी को मजहब के नाम पर तो किसी को caste के नाम पर। किसी को उसकी भाषा के लिए target करते हैं और किसी को उनकी चमड़ी के रंग के आधार पर। ऐसे बनेगा देश?

बनाना कौन चाहता है? यहाँ तो बस देश की जनता को दबाना है ताकि फिर से कोई freedom struggle न शुरू हो जाये।

किसी दिन तो लोगों की आँखें खुलेंगी और वे देख पाएंगे की 70 साल पुराने, already दूसरों के प्राचीन संविधान पर आधारित भारतीय संविधान एवं सन 1800 के IPC को पूरे ओवरहॉलिंग की आवश्यकता है। देखें वो दिन हमारे जीवनकाल में आता है या अगले जन्म में।
~
AK
Posted via mobile; excuse the typos;
Problem with the post?
Send us an email